नईदिल्ली (09 जनवरी 26)। सुप्रीम कोर्ट ने UPSC और अन्य सिविल सेवा परीक्षाओं में आरक्षण को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि कोई भी उम्मीदवार अगर परीक्षा के किसी भी चरण में आरक्षण का लाभ उठाता है, तो वह बाद में सामान्य श्रेणी (जनरल) की सीट पर नियुक्ति का दावा नहीं कर सकता, चाहे उसकी रैंक या अंक अन्य उम्मीदवारों से बेहतर ही क्यों न हों। यह फैसला आरक्षण और मेरिट के बीच स्पष्ट अंतर को तय करता है और UPSC नियमों की व्याख्या को मजबूत बनाता है।
जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस विजय बिश्नोई की पीठ ने एक अहम फैसले में व्यवस्था दी है कि यदि कोई अभ्यर्थी चयन प्रक्रिया के किसी भी पड़ाव (जैसे प्रीलिम्स) पर रिजर्वेशन का लाभ उठाता है, तो वह बाद में जनरल कैटेगरी की सीट पर दावा नहीं कर सकता। भले ही फाइनल मेरिट लिस्ट में उसके अंक सामान्य वर्ग के आखिरी उम्मीदवार से ज्यादा ही क्यों न हों। यह पूरा मामला साल 2013 की भारतीय वन सेवा (IFS) परीक्षा से जुड़ा है। इससे पहले कर्नाटक हाईकोर्ट ने एक अनुसूचित जाति (SC) के उम्मीदवार के पक्ष में फैसला सुनाते हुए उसे जनरल कैडर देने को कहा था, क्योंकि उसकी रैंक बेहतर थी। हालांकि, सर्वोच्च अदालत ने हाईकोर्ट के इस तर्क को खारिज कर दिया और केंद्र सरकार की अपील को हरी झंडी दे दी। कोर्ट ने परीक्षा नियमों का बारीकी से विश्लेषण किया और दो उम्मीदवारों के अंकों की तुलना से स्थिति स्पष्ट की: -साल 2013 की परीक्षा में सामान्य वर्ग का कटऑफ 267 था। उम्मीदवार 'जी. किरण' (SC) ने 247.18 अंक पाकर आरक्षित श्रेणी के आधार पर प्रीलिम्स पास किया। वहीं, 'एंटनी एस. मारियप्पा' ने 270.68 अंक लेकर जनरल कटऑफ पार किया। अंतिम सूची में किरण की रैंक 19वीं थी और एंटनी की 37वीं। जब कर्नाटक में उपलब्ध इकलौती 'जनरल इनसाइडर' सीट आवंटित करने की बात आई, तो केंद्र ने इसे एंटनी को दिया। किरण ने इसे चुनौती दी कि बेहतर रैंक होने के नाते सीट उन्हें मिलनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि परीक्षा नियम 2013 के तहत, यदि आपने शुरुआती स्तर पर ही कम अंक पाकर आरक्षित श्रेणी का लाभ ले लिया है, तो आप 'अनारक्षित' उम्मीदवारों की लिस्ट से बाहर हो जाते हैं। यह निर्णय उन हजारों अभ्यर्थियों के लिए सबक है जो प्रारंभिक परीक्षाओं में आरक्षण के जरिए कटऑफ पार करते हैं। अब यह स्पष्ट है कि यदि आप 'जनरल' सीट पर नियुक्ति चाहते हैं, तो आपको परीक्षा के पहले दिन से ही सामान्य श्रेणी के मानकों (कटऑफ और आयु सीमा) को पूरा करना होगा।