Monday, 28 Sep 2026

असफलता से सीखकर आगे बढ़ें विद्यार्थी: सीएम

भोपाल (01 सितंबर 26)। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि विद्यार्थी की वास्तविक सफलता केवल अच्छे अंक अथवा प्रमाण-पत्र प्राप्त करने में नहीं, बल्कि उसके संस्कार, विनम्रता, अनुशासन और व्यक्तित्व में निहित होती है। विद्यार्थी सफलता से उत्साहित हों, लेकिन अपने भीतर अहंकार नहीं आने दें। असफलता से निराश होने के स्थान पर असफलता के कारणों को समझें और उनसे सीख लेकर भविष्य को बेहतर बनाएँ। मैदान में उतरने वाला खिलाड़ी ही कभी हारता और कभी जीतता है। जीतने का सपना देखने और चुनौतियों का सामना करने का साहस रखने वाला ही सच्चा खिलाड़ी कहलाता है। संघर्षों से बचने वाले जीवन में कभी सफल नहीं होते। जीवन में कठिनाइयों और चुनौतियों से घबराने की आवश्यकता नहीं है। सफलता संघर्ष, धैर्य और दृढ़ संकल्प से प्राप्त होती है। परमात्मा ने प्रत्येक व्यक्ति को सीमित और मूल्यवान समय दिया है। विद्यार्थी इसका सदुपयोग करते हुए पूरी ईमानदारी से अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ें। आज किया गया परिश्रम ही कल की बड़ी सफलता का आधार बनेगा। 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार को भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में आयोजित राज्य स्तरीय ‘प्रतिभाशाली विद्यार्थी प्रोत्साहन योजना’ के राशि अंतरण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित इस राज्य स्तरीय कार्यक्रम का दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री ने सिंगल क्लिक से प्रदेश के लगभग एक लाख 22 हजार मेधावी विद्यार्थियों के बैंक खातों में लैपटॉप खरीदने के लिए 304 करोड़ 98 लाख 50 हजार रुपये से अधिक की राशि अंतरित की। प्रत्येक पात्र प्रतिभाशाली विद्यार्थी को 25 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई। योजना के अंतर्गत मध्यप्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल की कक्षा 12वीं की परीक्षा में प्रथम प्रयास में 75 प्रतिशत अथवा उससे अधिक अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को लाभान्वित किया गया है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विद्यार्थियों से कहा कि लैपटॉप केवल एक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण नहीं, बल्कि ज्ञान, अनुसंधान, नवाचार और भविष्य की नई संभावनाओं का प्रवेश-द्वार है। विद्यार्थी इसका उपयोग ऑनलाइन अध्ययन, डिजिटल पाठ्य सामग्री, ई-लाइब्रेरी, शोध तथा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए करें। तकनीक के माध्यम से अपने ज्ञान का विस्तार करते हुए विद्यार्थी अपने निर्धारित लक्ष्य को प्राप्त करने का संकल्प लें। उन्होंने कहा कि प्रत्येक विद्यार्थी के भीतर कोई न कोई विशिष्ट प्रतिभा अवश्य होती है। मूर्तिकार जिस प्रकार पत्थर में छिपी मूर्ति को पहचानकर अनावश्यक हिस्सों को हटाता है, उसी प्रकार शिक्षक विद्यार्थियों की प्रतिभा को पहचानकर उनके व्यक्तित्व को निखारते हैं। विद्यार्थियों की सफलता में उनके माता-पिता और शिक्षकों के त्याग, परिश्रम एवं मार्गदर्शन की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।


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