Monday, 28 Sep 2026

'Digital Arrest' के नाम पर 30,000 करोड़ का महाघोटाला

मुंबई (25 अगस्त 26)। देश भर में फैला 'डिजिटल अरेस्ट' और साइबर धोखाधड़ी का एक ऐसा सनसनीखेज नेटवर्क उजागर हुआ है, जिसने सुरक्षा एजेंसियों के भी होश उड़ा दिए हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने देशभर में कथित साइबर धोखाधड़ी और 'डिजिटल अरेस्ट' से जुड़े धनशोधन मामले की जांच के तहत दो लोगों को गिरफ्तार किया है। सूत्रों ने सोमवार को यह जानकारी दी। इस मामले में करीब 30,000 करोड़ रुपये के लेनदेन का संदेह है। सूत्रों ने बताया कि फहीम मोइन हुसैन सैयद और नईम मुईन सैयद को रविवार को मुंबई से हिरासत में लिया गया। 

सूत्रों के अनुसार, ईडी ने यह जांच उस घटना के बाद शुरू की थी जिसमें साइबर जालसाजों ने गोवा की एक महिला को कथित तौर पर 'डिजिटल अरेस्ट' कर मई से जून 2025 के बीच 2.60 करोड़ रुपये कुछ कथित सीक्रेट सुपरविजन अकाउंट में अंतरित करने के लिए उसे मजबूर किया। 'डिजिटल अरेस्ट' साइबर ठगी का एक तरीका है, जिसमें जालसाज खुद को पुलिस या जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर वीडियो कॉल के जरिए व्यक्ति को डराते-धमकाते हैं और उससे धन ऐंठते हैं। उन्होंने बताया कि केंद्रीय वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग के अधीन आने वाली एजेंसी ने दोनों आरोपियों को रविवार को मुंबई में धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की एक विशेष अदालत में पेश किया। अदालत ने उन्हें गोवा के पणजी ले जाने के लिए ईडी को उनकी 'ट्रांजिट रिमांड' दे दी। यह मामला गोवा में दर्ज है। 

एजेंसी दोनों को सोमवार को पणजी की एक विशेष अदालत में पेश कर उनकी हिरासत का अनुरोध करेगी ताकि वह उनसे पूछताछ कर सके। जांच के दौरान एजेंसी को पता चला कि पीड़िता से ठगी गई रकम बैंक खातों में जमा कराई गई फिर उसे नकद निकाला गया और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) से लाइसेंस प्राप्त मुद्रा परिवर्तकों के जरिए विदेशी मुद्रा में बदला गया। सूत्रों ने बताया कि एजेंसी को संदेह है कि इस कथित साइबर अपराध नेटवर्क के जरिए करीब 27,000 करोड़ रुपये का बैंक लेनदेन और 3,000 करोड़ रुपये का नकद लेनदेन किया गया। यह नेटवर्क 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में दर्ज करीब 300 शिकायतों और 150 से 160 प्राथमिकियों से जुड़ा बताया जा रहा है। 

सूत्रों के अनुसार, पीड़ितों से की गई कथित धोखाधड़ी की कुल रकम करीब 4,000 करोड़ रुपये आंकी गई है। उन्होंने बताया कि ईडी ने इस मामले में गोवा और मुंबई में दो चरण में तलाशी अभियान चलाया। पहला अभियान जुलाई में और दूसरा 21 अगस्त को चलाया गया। इन कार्रवाइयों के दौरान करीब 3.25 करोड़ रुपये जब्त किए गए।  सूत्रों के अनुसार धन के लेनदेन की जांच में पता चला कि इस नेटवर्क से जुड़ी मुखौटा या फर्जी कंपनियों में चालकों और छोटे कर्मचारियों को निदेशक बनाया गया था जिनमें से कई एक कमरे के मकानों में रहते थे। उन्होंने बताया कि साइबर धोखाधड़ी के मामलों में आम तौर पर इस तरह का तौर-तरीका अपनाया जाता है। 










 


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