Monday, 28 Sep 2026

'दृश्य प्रतीकवाद, चित्रों से लेकर कथात्मक अर्थ तक'

मुंबई (19 जून 24)। 18वें मुंबई अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (एमआईएफएफ) में मास्टर सिनेमेटोग्राफर संतोष सिवन के साथ एक आकर्षक ‘इन-कन्वर्सेशन’ सत्र आयोजित किया गया, जिसका शीर्षक था ‘दृश्य प्रतीकवाद, चित्रों से कथात्मक अर्थ तक’। यह कार्यक्रम मुंबई के एनएफडीसी परिसर में आयोजित हुआ। मलयालम, तमिल और हिंदी सिनेमा के साथ-साथ अंतर्राष्ट्रीय परियोजनाओं में अपने काम के लिए प्रसिद्ध, संतोष सिवन ने सिनेमेटोग्राफी की कला पर अपनी गहन अंतर्दृष्टि साझा की। प्रतिष्ठित फिल्म समीक्षक नम्रता जोशी ने इस सत्र का संचालन किया।

संतोष सिवन ने एक दृश्य के भीतर रहस्य पैदा करने में अंधकार और प्रकाश के संतुलन के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा, 'रहस्य वाली हर चीज़ में अंधकार और प्रकाश का मिश्रण होना चाहिए। जब भी मैं कोई लाइटिंग करता हूं, तो मैं सुनिश्चित करता हूं कि यह मिश्रण मौजूद हो। अगर आप पियानो बजा रहे हैं, तो आपको सभी कुंजियों के साथ बजाना चाहिए।' यह दर्शन उनकी विशिष्ट दृश्य शैली का आधार है, जिसने विश्व स्तर पर दर्शकों को आकर्षित किया है। संतोष सिवन ने अपने विविध अनुभवों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि विभिन्न फिल्म शैलियों के लिए विशिष्ट निरूपण की जरूरत होती है और उन्हें आर्ट हाउस से लेकर व्यावसायिक फिल्मों तक विभिन्न शैलियों में काम करने में आनंद आता है। हॉलीवुड में अपने काम को लेकर सिवन ने कहा कि उद्योग में समय-सारिणी का कड़ाई से अनुपालन किया जाता है। उन्होंने आगे कहा, 'मैंने जिन परियोजनाओं में काम किया है, उनसे मैंने कुछ न कुछ सीखा है।'

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